बॉम्बे हाईकोर्ट ने किशोर बियानी और राकेश बियानी के खातों को ‘फ्रॉड’ घोषित करने का बैंक ऑफ इंडिया का फैसला रद्द किया

 

बॉम्बे हाईकोर्ट ने फ्यूचर लाइफस्टाइल फैशन्स लिमिटेड (FLFL) के प्रमोटर किशोर बियानी और राकेश बियानी के खातों को ‘धोखाधड़ी (फ्रॉड)’ घोषित करने के बैंक ऑफ इंडिया के फैसले को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि बैंक ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वर्ष 2024 के फ्रॉड मास्टर डायरेक्शंस के तहत आवश्यकतानुसार अपने निर्णय के समर्थन में कोई कारण नहीं बताया।

न्यायमूर्ति बी.पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौश पूनावाला की खंडपीठ ने 21 जून 2025 के बैंक के आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि यह आदेश ‘पूरी तरह से बिना कारणों वाला’ है और RBI के निर्धारित ढांचे के विपरीत है।

बियानी बंधुओं ने खातों को फ्रॉड घोषित करने वाले आदेश, इससे पहले जारी कारण बताओ नोटिस तथा 7 अगस्त 2024 की फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने यह भी मांग की थी कि बैंक को इस आदेश पर कार्रवाई करने से रोका जाए, जिसमें उनके नाम RBI की सेंट्रल फ्रॉड रजिस्ट्री में दर्ज करना भी शामिल है।

फ्यूचर लाइफस्टाइल फैशन्स लिमिटेड ने बैंक ऑफ इंडिया से ऋण सुविधाएं प्राप्त की थीं, जिनमें किशोर बियानी गारंटर थे। कंपनी का खाता गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) घोषित होने के बाद बैंक ने फॉरेंसिक ऑडिट कराया और बाद में खाते को फ्रॉड घोषित कर दिया।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि बैंक के आदेश में केवल फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के कुछ अंशों को दोहराया गया है और यह स्वतंत्र रूप से यह नहीं बताया गया कि खाते को फ्रॉड क्यों घोषित किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के प्रबंध निदेशक (मैनेजिंग डायरेक्टर) ने कारण बताओ नोटिस का विस्तृत जवाब दिया था, लेकिन आदेश पारित करते समय बैंक ने उस पर विचार ही नहीं किया।

बैंक ऑफ इंडिया ने दलील दी कि बियानी बंधुओं ने स्वयं कारण बताओ नोटिस का कोई जवाब दाखिल नहीं किया था, इसलिए वे प्रबंध निदेशक के जवाब का लाभ नहीं ले सकते। बैंक ने यह भी कहा कि फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में ही फ्रॉड घोषित करने के पर्याप्त कारण मौजूद हैं।

बैंक की इस दलील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि RBI के फ्रॉड मास्टर डायरेक्शंस के अनुसार किसी खाते को फ्रॉड घोषित करने से पहले बैंक के लिए कारणयुक्त (Reasoned) आदेश पारित करना अनिवार्य है।

पीठ ने कहा- जब विवादित आदेश का अवलोकन किया जाता है, तो स्पष्ट होता है कि उसमें यह बताने का कोई कारण नहीं है कि कंपनी तथा याचिकाकर्ताओं के खातों को ‘फ्रॉड’ क्यों घोषित किया गया।

अदालत ने आगे कहा- विवादित आदेश को बरकरार नहीं रखा जा सकता क्योंकि यह पूरी तरह से कारणों से रहित है और वर्ष 2024 के फ्रॉड मास्टर डायरेक्शंस की अनिवार्य आवश्यकताओं के विपरीत है।

हाईकोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया को यह भी निर्देश दिया कि वह सुनिश्चित करे कि किशोर बियानी और राकेश बियानी के नाम RBI की सेंट्रल फ्रॉड रजिस्ट्री में ‘फ्रॉड’ के रूप में दर्ज न हों। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि बैंक वर्ष 2024 के फ्रॉड मास्टर डायरेक्शंस के अनुरूप नई कार्रवाई शुरू करने के लिए स्वतंत्र है।

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